Dharmendra Mishra
यह उपन्यास उन युवाओं की दास्तान है जो जाति, वर्ग, अमीरी-गरीबी और सामाजिक कुरीतियों से परे, एक ऐसे समाज का सपना देखते हैं जहाँ इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म हो।नायक के भीतर उठती भावनाओं की लहरें, प्रेम की तरंगे और संघर्ष की आँधियाँ उसे बार-बार चुनौती देती हैं कि क्या वह समाज के इन बंधनों को तोड़ पाएगा? क्या उसके सपने पूरे होंगे? क्या मंज़िल उसे हासिल होगी?इस कहानी में आपको मिलेगा-प्रेम और तकरार का रोमांच,रहस्य और अपराध की गुत्थियाँ,हँसी और व्यंग्य की झलक,और आँसुओं से भीगी चिर करुण वेदना।यह उपन्यास आपको विचारों की एक नई ऊँचाई पर ले जाएगा, जहाँ सिर्फ़ बंधन और दायरे नहीं होंगे, बल्कि मनुष्यता, नैतिकता, समानता और न्याय की रोशनी होगी।तो आइए, इस यात्रा में साथ चलें जहाँ संघर्ष है, उम्मीद है और एक नए समाज का सपना है।